ये जिंदगी हर एक इंसान की

ये जिंदगी हर एक इंसान की,स्वयं में ही एक गहरा राज है

या यूं कहो कि सांसो की परवाज़ पर ,जिस्म की रियाज़ है

इसे भेजता है जमीं पर ईश्वर ,फूल से सुंदर पानी सा बेरंग

और इसी इंसां की कारगुजारियां ,ईश्वर को कर देती हैं दंग

क्या क्या नही कर सकता है ये,निज स्वार्थ साधन के लिए

एकत्र कर लेता है सारी दुनिया , जिंदगी  प्रसाधन के लिए

जब भर जाएगा पापों का घड़ा,फुट जाएगा एक वक़्त पर

सर् पकड़ कर रोयेगा ,क्योंकि ईश्वर की लाठी बेआवाज़ है

ये जिंदगी हर एक इंसान की—————–

हो पथ भ्रष्ट ये कभी ,पहुंचता है दानवता की दहलीज पर

प्राण हरता है अपनी ही वधु के ,लटका देता है सलीब पर

और कभी कभी तो ,व्यवधान डालता है ईश्वर संविधान में

छीनता है सांस अपनी ही संतान के,आने से पूर्व संसार में

कार्य तो सबसे ही निकृष्ट तम,है इस दुष्ट का एक और भी

बलात्कार नाम से ही घृणित,ये तो दे सकता है अंजाम भी

इसके दुष्कर्मों की सूची है लंबी, तुम सुनते हुए शरमाओगे

कैसे मिले इसको सज़ा ,पैदा करने वाले के पास इलाज़ है

ये जिंदगी हर एक इंसान की————–

लेकिन इंसान इस दुनिया में सारे,होते नहीं है सिर्फ बुरे ही

सत्य निष्ठ त्यागी संयमी सदाचारियों की,है कोई कमी नहीं

न किसी के धन से मतलब,ना दुनियावी चकाचोंध सुहाती

संलग्न है सांसारिक उद्धार में,ये ही इनके जीवन की थाती

सच पूछो तो ये दुनिया,इनके पुण्यों के बल पे  टिकी हुई है

हो जाती महा प्रलय कभी की,ईश्वर से भी कुछ भूल हुई है

वैसे है दुस्साहस हमारा,ईश्वर कृतित्व में दोष निकाल रहे है

वक़्त अल्प है आवश्यक सुधार है, जो करना हमें  आज है

ये जिंदगी हर एक इंसान की————–

ये जिंदगी——————————–

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