घबरा न बेटी किसी बला से

मेरा स्नेह प्यार है कवच ये तेरा, घबरा न बेटी किसी बला से

बिगाड़ तेरा कोई क्या सकेगा, किसी ज्ञान से किसी कला से

घूमो तुम जंगल की शेरनी सी ,नही है डरने की कोई जरूरत

जो देख ले तुम्हे आंख भरके, हमे दिखाना तुम उसकी सूरत

छोड़ो पायल और हटाओ चूड़ी, हाथों में अपने कड़ा पहन लो

हाथ मे तुम पकड़ लो हॉकी,और कमर से अपनी चेन बांध लो

करे इशारे जो तुमको कोई ,तो कान के नीचे जरा बजा के रखना

एक बार से अगर न माने,तो खबर तुम उसकी पुलिस को करना

हैं समाज मे कुछ विडम्बनाएं  ,पड़ेगा चलना तुम्हे जरा संभलकर

मगर वीरता से न किसी से डरकर,नही तनिक सा भी झिझककर

पार कर लोगी तुम सभी रुकावटें, वीरांगना सी मजबूत तनकर  

भेज तो देता तुम्हें फौज में,बस रुका हूँ मैं कुछ सोच समझकर  

समाज अभी आगे नही बढ़ा है, कि ये सारी बातें सहन कर ले

और समय के साथ चलकर,कुछ आधुनिक बातें ग्रहण कर ले

समाज मे रहकर बैर समाज से,ऐसी अभी मेरी सामर्थ्य नही है      

और बिगाड़ के सबसे रहूं अकेला,उसका भी कुछ अर्थ नहीं है

अभी शिक्षा तुम अपनी पूरी कर लो,भविष्य की सोचेंगे बाद में

भ्रमित करेंगे तुमको लड़के ,फंस न जाना किसी झूठे  जाल में

ये नही है बंधन,है छूट तुमको, चुनना तुम साथी अपने ही मन से

जीवन भर का साथ गृहस्थ है, ये काम करना तुम बड़ी समझ से

खूब कमाना प्यार से रहना, और तुम अपना गृहस्थ भी बढ़ाना

मगर काम सब समय से करना, समय से पहले बहक न जाना

तुम ही हमारे घर की उम्मीद हो, बेटी बात अपने मन मे रखना

मेरी बताई बातें सारी ध्यान रखना,न नाम हमारा खराब करना

तुम हमारे दिल दिमाग मे बसी हो,सब कुछ करेंगे तेरी उन्नति को

तुम भी अपना सर्वस्व लगाकर ,बस सुनिश्चित कर लो प्रगति को

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