गीत ग़ज़ल से मन बहलाकर

गीत ग़ज़ल से मन बहलाकर
मैं तुम्हें सुलाने आया हूँ
बासंती शब्दों के क्रम से
कुछ स्वप्न दिखाने आया हूँ
देखो स्वप्न सुनहरे तुम
जीवन की तरुणाई के
जीवन की खुशियां सारी तुमसे मिलवाने लाया हूँ
मैं तुम्हे सुलाने आया हूँ, मैं गीत सुनाने आया हूँ
देखो तुम हो साथ मेरे, मैं कितना खुश किस्मत हूँ
हर सुबहा है दृश्य विहंगम, और शामें कुछ अलसाई सी
हर दिन है त्योहार मेरा ,और रातों में गहराई सी
घर मेरा उपवन जैसा है ,भँवरे जिसमे गुंजन करते हैं
रंग बिरंगे तितली जुगनू ,खुशी से उड़ते फिरते हैं
कष्ट नहीं है कोई मुझको, सब सम्मान जो मेरा करते हैं
मैं भी अपने पूरे तन मन धन से ,इन सब पर जान लुटाता हूँ
फिर से मिले मुझे यह जीवन
जिसमे इन सबका साथ रहे
परम पिता परमेश्वर से, बस ये गुहार लगाने आया हूँ
मैं तुम्हें सुलाने आया हूँ
मैं गीत सुनाने आया हूँ

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