Category Archives: Prem

गीत ग़ज़ल से मन बहलाकर

गीत ग़ज़ल से मन बहलाकर
मैं तुम्हें सुलाने आया हूँ
बासंती शब्दों के क्रम से
कुछ स्वप्न दिखाने आया हूँ
देखो स्वप्न सुनहरे तुम
जीवन की तरुणाई के
जीवन की खुशियां सारी तुमसे मिलवाने लाया हूँ
मैं तुम्हे सुलाने आया हूँ, मैं गीत सुनाने आया हूँ
देखो तुम हो साथ मेरे, मैं कितना खुश किस्मत हूँ
हर सुबहा है दृश्य विहंगम, और शामें कुछ अलसाई सी
हर दिन है त्योहार मेरा ,और रातों में गहराई सी
घर मेरा उपवन जैसा है ,भँवरे जिसमे गुंजन करते हैं
रंग बिरंगे तितली जुगनू ,खुशी से उड़ते फिरते हैं
कष्ट नहीं है कोई मुझको, सब सम्मान जो मेरा करते हैं
मैं भी अपने पूरे तन मन धन से ,इन सब पर जान लुटाता हूँ
फिर से मिले मुझे यह जीवन
जिसमे इन सबका साथ रहे
परम पिता परमेश्वर से, बस ये गुहार लगाने आया हूँ
मैं तुम्हें सुलाने आया हूँ
मैं गीत सुनाने आया हूँ

पत्ता पत्ता बूटा बूटा, बस आज खुशी से झूम रहा है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा, बस आज खुशी से झूम रहा है
मेरी आँखों के शीशे में भी, अक्स तुम्हारा घूम रहा है
आज सुना है तुम आओगे, सुरम्य संगीत की तान लिए
मदमाती मस्ती की मय का, अपनी आंखों में जाम लिए
हम भी प्रतीक्षा में अधीर हैं, अति शीघ्र आ जाओ तुम
तड़प रहे है हम तेरे प्यार को, आके जल्द लुटाओ तुम
गुल गुलशन की तो बात अलग, कांटे भी उत्साहित है
उनका भी एक स्नेह निमंत्रण, तेरे स्वागत मे प्रस्तवित है
बहुत दिनों के बाद आज, चमन में दीवाली सी आयी है
तू आएगी इसी खुशी में, चमन ने होली सुबह मनाई है
आज चाँद की धवल चांदनी, इस उपवन में बिखरेगी
मृदु गीतों की स्वर माला, वीणा के तारों पर उतरेगी
गुलशन में बस उत्सव होगा, और जीव जंतु तक नाचेंगे
दसों दिशाओं में खुशियां होंगी, दुख दूर यहां से भागेंगे
उपकार बहुत उस ईश्वर का, जिसने दिन ये दिखलाया है
कण कण में फैलाया प्रकाश, अंधेरा हमसे दूर भगाया है