तुम तो मेरी जिंदगी का अनमोल कोहीनूर हो

तुम तो मेरी जिंदगी का अनमोल कोहीनूर हो
जरा और पास आओ ,अभी थोड़ा सा दूर हो
बैठ किसी पेड़ की छांव में ,जरा धूप के पांव में
कहानियां कुछ जिंदगी की ,तलाशेंगे जिंदगी में
जिंदगी क्यों अब हमारी,कुछ उलझ सी गयी है
जिंदगी में रौनक,अब कुछ कम क्यों हो गयी है
जिंदगी के उपवन में,हम कुछ नए बीज बोयेंगे
बिखर गए थे जो सपने,उन्हें फिर हम संजोएँगे
ये आंखों में हमारी ,जो दीखती है कुछ उदासी
हमारी पुरानी जिंदगी की,बची यादे हैं ये बासी
इन सभी को मिटायेंगे ,हम नए जीवन संगीत से
रंग नए हम भरेंगे जिंदगी में , अपनी नई प्रीत से
भूलकर उम्र याद करो,दिन अपनीं जवानी के तुम
पल भर को ही सही, गम की लकीरें होंगी ये गुम
जिंदगी हमारी ,एक उपन्यास से ज्यादा कुछ नही
हर वर्ष जिंदगी का ,एक पेज से ज्यादा कुछ नहीं
तुम पेज पलटते चलो ,बस रोज आगे बढ़ते चलो
नई नई दुनिया को देखो,नए पेज रोज पढ़ते चलो
न मायूस मन को करो ,न ईर्ष्या किसी से भी करो
जो है किस्मत में तुम्हारी,बस संतोष उसी से करो
चलते चलते मंज़िल भी, एक दिन आ ही जाएगी
मिल जाएगी पूर्ण शांति , सब चिंता चली जायेगी
वक़्त थोड़ा ही बचा है,तुम प्रेम से इसको काट लो
प्यार जो भी बाकी बचा,उसको आपस में बांट लो
यहां की सारी खुशियां ओ गम,यहीं पर रह जाएंगे
बस हमारे कर्म अच्छे या बुरे , हमारे साथ जाएंगे
भुला दे ये सारे दुख ,तू बिल्कुल भी उदास मत हो
आ मेरे पहलू में आ,पास हो पास हो और पास हो

गीत ग़ज़ल से मन बहलाकर

गीत ग़ज़ल से मन बहलाकर
मैं तुम्हें सुलाने आया हूँ
बासंती शब्दों के क्रम से
कुछ स्वप्न दिखाने आया हूँ
देखो स्वप्न सुनहरे तुम
जीवन की तरुणाई के
जीवन की खुशियां सारी तुमसे मिलवाने लाया हूँ
मैं तुम्हे सुलाने आया हूँ, मैं गीत सुनाने आया हूँ
देखो तुम हो साथ मेरे, मैं कितना खुश किस्मत हूँ
हर सुबहा है दृश्य विहंगम, और शामें कुछ अलसाई सी
हर दिन है त्योहार मेरा ,और रातों में गहराई सी
घर मेरा उपवन जैसा है ,भँवरे जिसमे गुंजन करते हैं
रंग बिरंगे तितली जुगनू ,खुशी से उड़ते फिरते हैं
कष्ट नहीं है कोई मुझको, सब सम्मान जो मेरा करते हैं
मैं भी अपने पूरे तन मन धन से ,इन सब पर जान लुटाता हूँ
फिर से मिले मुझे यह जीवन
जिसमे इन सबका साथ रहे
परम पिता परमेश्वर से, बस ये गुहार लगाने आया हूँ
मैं तुम्हें सुलाने आया हूँ
मैं गीत सुनाने आया हूँ

पत्ता पत्ता बूटा बूटा, बस आज खुशी से झूम रहा है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा, बस आज खुशी से झूम रहा है
मेरी आँखों के शीशे में भी, अक्स तुम्हारा घूम रहा है
आज सुना है तुम आओगे, सुरम्य संगीत की तान लिए
मदमाती मस्ती की मय का, अपनी आंखों में जाम लिए
हम भी प्रतीक्षा में अधीर हैं, अति शीघ्र आ जाओ तुम
तड़प रहे है हम तेरे प्यार को, आके जल्द लुटाओ तुम
गुल गुलशन की तो बात अलग, कांटे भी उत्साहित है
उनका भी एक स्नेह निमंत्रण, तेरे स्वागत मे प्रस्तवित है
बहुत दिनों के बाद आज, चमन में दीवाली सी आयी है
तू आएगी इसी खुशी में, चमन ने होली सुबह मनाई है
आज चाँद की धवल चांदनी, इस उपवन में बिखरेगी
मृदु गीतों की स्वर माला, वीणा के तारों पर उतरेगी
गुलशन में बस उत्सव होगा, और जीव जंतु तक नाचेंगे
दसों दिशाओं में खुशियां होंगी, दुख दूर यहां से भागेंगे
उपकार बहुत उस ईश्वर का, जिसने दिन ये दिखलाया है
कण कण में फैलाया प्रकाश, अंधेरा हमसे दूर भगाया है